आज़ादी की लड़ाई में कलमकारों ने भी अपनी सशक्त लेखनी से क्रांति का उलख जगाया था: डॉ. रणजीत कुमार सिंह
Sahibganj News :-- साहिबगंज महाविद्यालय के बीएड भवन में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवम राष्ट्रीय सेवा योजना, युवा खेल मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में सिद्धो - कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय संगोष्ठी का अयोजन, ( विषय "स्वतंत्रता संघर्ष में शिक्षा एवं साहित्य का महत्व") किया गया। महान स्वतंत्रता सेनानी सिद्धो मुर्मू एवम कान्हु मुर्मू के चित्र पर माल्यार्पण एवं मुख्य वक्ता डॉक्टर दिनेश नारायण वर्मा, प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर राहुल कुमार संतोष, एनएसएस के नोडल पदाधिकारी डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर राहुल कुमार संतोष ने कहा की आरसी दत्त, भारतेंदु हरिश्चंद्र, फकीर मोहन सेनापति, राधाचरण गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, शरारतचंद्र चट्टोपाध्याय, रविंद्र नाथ ठाकुर, माखन लाल चतुर्वेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, शिवमंगल सिंह सुमन, रामनरेश त्रिपाठी, रामधारी सिंह दिनकर, बद्रीनाथ चौधरी जैसे साहित्यकारों ने अपनी साहित्य, कविता, कहानी और उपन्यास के माध्यम से लोगों के बीच स्वतंत्रता संग्राम में एक नया जोश भर दिया था।
मौके पर एनएसएस के नोडल पदाधिकारी डॉक्टर रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीय इतिहास का वह योग है, जो पीड़ा, कड़वाहट, आत्मसम्मान, गर्व, गौरव तथा शहीद हुए लोगों से लिपटा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए इस महायज्ञ में समाज के प्रत्येक वर्ग ने अपने - अपने तरीके से बलिदान दिया है। इस स्वतंत्रता के लिए साहित्यकारों और लेखकों ने भी अपना भरपूर योगदान दिया है। अंग्रेजों को भगाने में कलमकारों ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई है। क्रांतिकारियों से लेकर आम लोग तथा देश के लेखकों ने भी अपने ओजश्वी शब्दों से जोश भरने का काम किया था।
कार्यक्रम को मुख्य रूप से डॉ. यश राज सिंह, प्रो. मरियम हेंब्रम, प्रो. नितिन कुमार ने भी संबोधित किया।कार्यक्रम का संचलन धनबाद की एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉक्टर शोभा मुर्मू ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रशान्त भारती ने किया।
इस संगोष्ठी में मुख्य रूप से डॉ. ध्रुव ज्योति कुमार सिंह, डॉ. शिवाननद अवस्थी, डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. मनोज कुमार गुप्ता, प्रो. रेखा चौधरी, मीरा कुमारी, महाविद्यालय की मनोहर टुडू, विनय टुडू, पलक, पिंकी, कैलाश सहित बी. एड. क्लास के दर्जनों छात्र - छात्राएं उपस्थित थे।
0 Response to " आज़ादी की लड़ाई में कलमकारों ने भी अपनी सशक्त लेखनी से क्रांति का उलख जगाया था: डॉ. रणजीत कुमार सिंह"
Post a Comment